मदुरा कार्बन इंडिया लिमिटेड के कार्बन ब्लेक प्रोजेक्ट को जनता ने दिखाई काली झंडी।

MADURA CARBON INDIA LTD Sariganv

उमरगांव तालुका के करजगांव क्षेत्र में, मदुरा कार्बन इंडिया लिमिटेड के कार्बन ब्लेक प्रोजेक्ट ( Download ) को वन एवं पर्यावरण मंत्रालय द्वारा मंजूरी देने के संबंध में वलसाड जिला समाहर्ता तथा जीपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी की अध्यक्षता में एक जन सुनवाई रखी गई। इस जन सुनवाई में लगभग 1 हजार से ज्यादा स्थानीय लोग उपस्थित रहे ओर इस प्रोजेक्ट का विरोध किया। मदुरा कार्बन इंडिया लिमिटेड के कार्बन ब्लेक प्रोजेक्ट का विरोध कर स्थानिय जनता ने साफ़ कर दिया है कि वह किसी भी कीमत पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली इस कंपनी के पक्ष में नहीं है।

स्थानिय जनता का कहना है कि गाँव में गरीब किसान को खेती के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिलता, ऐसे में मदुरा कार्बन इंडिया लिमिटेड के कार्बन ब्लेक प्रोजेक्ट को सरकार ने यदि मंजूरी दी तो उक्त इकाई प्रतिदिन लाखों लीटर पानी का उपयोग करेगी ओर गंदा पानी नदियों में छोड़ेगी, जिससे उक्त क्षेत्र की जनता को ओर पर्यावरण को भारी नुकसान होगा। इस सुनवाई के दौरान जहां एक तरफ कई सगंठानों ने भी अपनी अपनी और से लिखित विरोध दर्ज करवाया तो दूसरी और 300 से अधिक लोगो ने प्रोजेक्ट का विरोध करते हुए आत्मविलोपन की धम्की दी। कुल मिलकर सीधी सीधी भाषा में यह कह सकते है कि जनता इस प्रोजेक्ट के पक्ष में नहीं है ओर वह नहीं चाहती है कि विकास के नाम पर इस तरह के किसी भी प्रोजेक्ट को पर्यावरण के नाश हेतु स्वीकृति मिले।

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जीपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी और मदुरा कार्बन इंडिया लिमिटेड के मालिक की पहले से साठ-गांठ।

दरअसल स्थानिय जनता के मन में यह सवाल घर किए बैठा है कि जब वापी जीपीसीबी के अधिकारी वापी की औधोगिक इकाइयों के प्रदूषण से दमण गंगा नदी का रक्षण नहीं कर पा रहे है तो कार्बन ब्लेक के प्रदूषण से सरिगांव जीपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी पर्यावरण का रक्षण कैसे करेंगे? वैसे यह सवाल इस लिए भी किया जा रहा है क्यो कि वापी की जनता एक लम्बे समय से वापी की औधोगिक इकाइयों के प्रदूषण से परेशान है और अभी हाल ही में जीपीसीबी के अधिकारियों की खराब कार्यप्रणाली और कमाउनीति का भंडा एनजीटी द्वारा गठित कमिटी की एक रिपोर्ट से फुट चुका है। हालांकि कमिटी की दूसरी रिपोर्ट अभी आनी बाकी है। लेकिन कमिटी की पहली रिपोर्ट से यह तो साफ़ हो गया कि वापी जीपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारियों ने अपना काम ईमानदारी से नहीं किया ओर नियमानुसार प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों पर कार्यवाही नहीं की। जनता का मानना है कि वापी हो या सरिगांव, जीपीसीबी के अधिकारियों के लिए प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयां सोने का अंडा देने वाली मुर्गी के समान है और जनता के लिए उन्ही इकाइयों का प्रदूषण किसी कोबरा के विश के समान। प्रदूषण फैलाने वाली कोई भी इकाई, इकाई कि स्थापना और उत्पादन की अनुमति प्राप्त करने तक ही पर्यावरण संबन्धित नियमों का पालन करती है एक बार इकाई कि स्थापना और उत्पादन कि अनुमति इकाई को मिल गई तो उसके बाद इकाई पर्यावरण संबन्धित नियमों का पालन नहीं करती बल्कि पर्यावरण की रक्षा करने वाले अधिकारियों के संबंध बनाकर अपनी ऐशगाह आबाद करने के लिए पर्यावरण का नाश करने में कोई कसर बाकी नई रखती। जनता का हाय भी कहना है कि सरिगांव जीपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी और मदुरा कार्बन इंडिया लिमिटेड के मालिक के बीच काफी पहले से साठ-गांठ है और पर्यावरण की रक्षा करने वाले सरिगांव जीपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी उक्त इकाई के पक्ष में है।

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जनता का कहना है कि कार्बन ब्लेक प्रोजेक्ट का मालिक गाँव में नहीं रहता उसका घर किसी औधोगिक इकाई की चिमनी पर नहीं है बल्कि मुम्बई के उस लोखंडवाला क्षेत्र में है जहां जाने माने फ़िल्मी सितारे रहते है इस लिए औधोगिक इकाई के प्रदूषण से जनता को होने वाली परेशानी का अंदाजा ना इकाई संचालक लगा सकता है ना जीपीसीबी के अधिकारी लगा सकते है। जनता का यह भी कहना है कि यदि इकाई संचालक और जीपीसीबी के अधिकारी पर्यावरण प्रेमी है तो कुछ दिन इकाई की चिमनी के पास झोपड़ी बनाकर उसमे अपना जीवन बसर करके देखे प्रदूषण क्या होता है और प्रदूषण से कितनी परेशानी होती है उन्हे तब पता चलेगा जब वह स्वय अपने वातानुकूलित कार्यालयों से बाहर निकालकर उनसे रूबरू हो।

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मदुरा इंडस्ट्रियल टैक्स्टाइल लिमिटेड और मदुरा कार्बन इंडिया लिमिटेड दोनों इकाइयों का मालिक एक।

गुजरात राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (SEIAA) द्वारा वर्ष 2017 में मदुरा इंडस्ट्रियल टैक्स्टाइल लिमिटेड को पर्यावरण मंजूरी दी गई थी। ( Download Environment Clearance ) बताया जाता है कि उक्त इकाई (SEIAA) द्वारा जारी पर्यावरण मंजूरी में दिए गए नियमों को भी कई बार धतता बता चुकी है। मदुरा इंडस्ट्रियल टैक्स्टाइल लिमिटेड को पर्यावरण नियमों का पालन नहीं करने के संबंध में कई बार क्लोज़र नोटिस भी दिया गया है, अब ऐसे में जनता की चिंता स्वाभाविक है क्यो कि जीपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी ने बताया की मदुरा इंडस्ट्रियल टैक्स्टाइल लिमिटेड का मालिक ओर मदुरा कार्बन इंडिया लिमिटेड का मालिक एक ही है, मतलब की जो इकाई पहले से ही पर्यावरण संबन्धित नियमों की अनदेखी कर रही है वही इकाई अब मदुरा कार्बन इंडिया लिमिटेड के कार्बन ब्लेक प्रोजेक्ट की स्वीकृति मांग रही है।

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